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लड़की ही बनेगी अब कुंवर सा का आने वाला भविष्य

यह बोल कर वह उसे kखींचते हुए अपने साथ ले जाने लगता है । । की तभी उसके पीछे खींचते हुए चली जा रही धरा की नजर अचानक ही एक तरफ जाती है । और उसकी आंखे बड़ी हो जाती है । । और वह डर से तुरंत आद्विक का हाथ अपनी पूरी ताकत से खींचते हुए उसे दूसरी तरफ धक्का देते हुए जोर से चिल्लाती है - कुंवर सा । ।

और तभी एक गोली की आवाज के साथ धरा वही जमीन पर जा गिरती है । । और आद्विक उससे थोड़ी दूरी पर दूसरी तरफ जाकर गिरता है । । 

अब आगे 

गोली चलने की आवाज पर सभी इधर उधर भागने लगते है । और चारों तरफ अफरा तफरी मच जाती है । ।

वही पूजा में बैठे सभी लोग भी गोली की आवाज पर तुरंत उठ कर खड़े हो जाते है । । और सूर्या अपने चारों तरफ देखता है । तो उसे वहां पर सभी नजर आते है । लेकिन आद्विक उसे नजर नहीं आता है । जिससे उसकी नजरे सर्द हो जाती है । और वो ओमी को चिल्लाते हुए कहता है - ओमी,, आद्विक को ढूंढो । ये हमला जरूर उसी पर हुआ है । 

रूडी पूरे हवेली के एग्जिट डोर को क्लोज करवा दो । कोई भी यहां से भागना नहीं चाहिए । जब तक मुझे मेरा बेटा सही सलामत मिल नही जाता । कोई भी बाहर कदम नहीं रखेगा । । 

यह बोलते हुए वह अपना गठबंधन वाला दुपट्टा सोना के गले में डालते हुए उसे देखता है जो की खुद भी घबराई हुई थी । । और वह उसे देख कर कहती है - आद्विक,, 

तो सूर्या उसके सिर को चूम कर उससे कहता है - कुछ नही होगा उसे । अगर उसे एक खरोच भी आई होगी तो मैं पूरे राजस्थान को आग लगा दूंगा । इसलिए एक भी आंसू नहीं बहने चाहिए तुम्हारी आंखों से । मैं अभी आद्विक को लेकर आता हूं । । 

यह बोल कर वह ओमी और रूडी की तरफ देखता है । और वहां से दूसरी तरफ चला जाता है । वही रूडी और ओमी भी उसके साथ चल जाते है । और गौरी और रागिनी सोना के पास आ जाती है । । 

वही दूसरी तरफ आद्विक के पास तुरंत ही बहुत सारे गार्ड्स आकार खड़े हो जाते है । । और वह अपनी जगह से तुरंत खड़ा होता है और धरा की तरफ भागता है । जो की दूसरी तरफ गिरी हुई थी । और उसके सिर पर छोट भी लगी हुई थी । जिससे वह दर्द से रो रही थी ।  ।

पर सबको भागता देख कर वह अपनी जगह से उठ नही पा रही थी । । 

तभी आद्वीक दौड़कर उसके पास आता है । और उसे उठाते हुए उसके सिर को देखता है जिसमे से बहुत खून बह रहा था । । 

जिसे देख कर आद्विक की आंखे सर्द हो जाती है । । और वह अपने चारों तरफ अपनी डार्क नजरों को घुमा कर देखता है । तो उसकी नजर भीड़ में एक आदमी पर पढ़ती है जो की उसे देख कर नजरे चुरा रहा था । । 

उस आदमी को देख कर आद्विक के चेहरे के भाव बदल जाते है । । और वह अपने पास में खड़े हुए गार्ड्स के हाथ से गन छीन कर उस आदमी को शूट कर देता है । । जिससे गार्ड्स को कोई भी हैरानी नही होती । । क्योंकि आद्विक को दो सालों से इन सब चीजों की ट्रेनिंग दी जा रही थी । और उसको ट्रेंड खुद सूर्या, ओमी और रूडी कर रहे थे । जिससे उसकी शूटिंग बिलकुल परफेक्ट हो चुकी थी । । 

वही धरा गोली की आवाज सुन कर अपने कान पर हाथ रख लेती है । तो आद्विक गन को गार्ड्स की तरफ फेकते हुए उसके पास जाकर उसके सिर को देखते हुए उससे पूछता है - तुम पागल हो । मुझे धक्का देने की क्या जरूरत थी । देखो खुद लग गई न अब तुम्हे । । 

तो धरा उससे रोते हुए कहती है - वो आपको गोली लग जाती । मैने देखा था वो आप पर ही गोली चलाने वाले थे । । 

यह कहते हुए वह अपने सिर को पकड़ रही थी । जहां पर इस वक्त छोट लगी थी और आद्विक उसके चोट पर निकल रहे ब्लड पर अपना रुमाल रख देता है ।  । 

तभी वहां पर बहुत सारे गार्ड्स और आ जाते है । और सूर्या ओमी और रूडी भी पहुंच जाते है ।। वही सूर्या आद्विक को सलामत देख कर उसके पास जाता है । और उसे धरा से अलग करके तुरंत अपने सीने से लगाते हुए उससे पूछता है - तुम ठीक हो । 

तो आद्विक अपने चेहरे पर हल्की सी स्माइल लिए हुए उससे कहता है  - मैं ठीक हूं डैड । ।

तो सूर्या उसे खुद से अलग कर उसे अपनी सर्द नजरों से देखते हुए गुस्से भरी आवाज में उससे कहता है - मना किया था ना हवेली से दूर जाने के लिए । । फिर यहां क्या कर रहे थे तुम । । 

तो उसकी गुस्से भरी आवाज पर धारा तुरंत आद्विक के पीछे छुप जाती है । । 

और आद्विक अपने डैड की गुस्से भरी आवाज पर चुपचाप सिर झुका कर उनसे कहता है - सॉरी डैड । 

तो सूर्या उसके सॉरी कहने पर उसे गुस्से से घूरते हुए देख उसका हाथ पकड़ लेता है । और उसे वहां से लेकर जाने लगता है । ।

वही धरा बस अपने सिर को पकड़े हुए रोते रोते उन लोगो को जाता हुआ देखने लगती है । ।

वही आद्विक भी बार बार पलट पलट कर धरा को ही देख रहा होता है । उसके सिर से अभी भी खून बह रहा था । ।

कुछ देर बाद 

हवेली के अंदर 

सभी लोग हाल में बैठे हुए थे । कल्याणी देवी अपने दाता हुकुम की कुर्सी पर बैठी हुई थी । । और उनके सामने सारे पंडित और पुरोहित बैठे हुए थे । जिनके हाथो में एक ही कुंडली थी । जिस पर सभी विचार कर रहे थे । ।

वही उनके सामने देवराज जी और उनकी पत्नी अलखनंदा, गौतम और गौतमी अपने बेटे के साथ , ओमी गौरी और रूडी और रागिनी भी अपने बच्चो के साथ वहां मौजूद थे । ।

तभी सूर्या भी सोना और आद्विक के साथ कपड़े बदल कर वहां पहुंच जाता है । । 

की तभी उन सभी को कल्याणी देवी की कठोर और भारी आवाज सुनाई देती है - जो कुछ भी आज हुआ । वो बिलकुल भी अच्छा नहीं था । । होने वाले कुंवर सा के जन्मदिन पर इस तरह का अपशगुन होना , ठीक बात नही है सूर्या । । 

यह बोलते हुए वह सूर्या को देखती है । । तो सूर्या उनसे कहता है - पर आद्विक अब बिल्कुल ठीक है दादी सा । गार्ड्स से पता चला की उस पर हमला जरूर हुआ था लेकिन एक लड़की ने उसे दूसरी तरफ धक्का देकर गोली लगने से बचा लिया । । 

यह सुनते ही कोई कुछ कहता की उससे पहले ही वहां सभी पंडितों के बीच बैठ मुख्य पुरोहित जी अपने हाथो में पकड़ी हुई कुंडली को देखते हुए बड़ी ही गंभीर आवाज में कहते है - वो लड़की ही बनेगी अब कुंवर सा का आने वाला भविष्य । । 

उनके यह कहते ही सभी लोग उनकी तरफ देखने लगते है । वही कल्याणी देवी उनकी बात पर उनसे कहती है - क्या कहना चाहते है आप पुरोहित जी । कौन लड़की और उसका भविष्य कुंवर से कैसे जुड़ा हो सकता है । । 

तो पुरोहित जी उनकी बात पर आद्विक की कुंडली उनके सामने रखते हुए उनसे कहते है - माफ कीजिएगा दाता हुकुम । लेकिन कुंवर की कुंडली के हिसाब से ग्रह दोष के बहुत ही बुरे प्रभाव नजर आ रहे है उन पर । । और ये आज जो हमला हुआ ये तो सिर्फ अभी इस दोष की शुरुआत हुई है । ।

इससे आगे तो अभी और भी बड़े बड़े खतरे कुंवर की कुंडली में दिखाई दे रहे है । । और इन खतरों के चलते उनके कुंडली के योग में अकाल मृत्यु का भी योग दिखाई दे रहा है । यह कहते हुए वह थोड़े धीमे हो जाते है । । 

वही उनकी बात सुन कर सभी के पैरों तले जमीन खिसक जाती है । सिवाय सूर्या और आद्विक के । उन दोनो के चेहरे पर अब भी कोई भाव नहीं थे । । 

तभी कल्याणी देवी जी तुरंत पुरोहित जी से अपने कठोर आवाज में पूछती है - ये आप क्या कह रहे है पुरोहित जी । । हमने खुद कुंवर सा के जन्म पर उनकी जन्म पत्रिका बनवाई थी । और स्वयं हमारे खानदानी राजपुरोहित जी ने हमसे कहा था की उनके कुंडली में राजयोग है । । दौलत और शोहरत दोनो ही उसके कदम चूमेंगे । न मृत्यु का भय और न ही किसी का खौफ ऐसा व्यक्तित्व का धनी होंगे हमारे कुंवर सा । । फिर ये अकाल मृत्यु का योग कैसे बन सकता है अचानक । ।

तो पुरोहित जी उनकी बात सुन कर उनसे कहते है - कभी कभी कुछ घटनाएं जीवन में अचानक ही घटित होती है दाता हुकुम । और यही घटनाए आगे चल कर एक नए भविष्य का आरंभ करती है । । लोग अक्सर इन घटनाओं को अनदेखा कर देते है एक हादसा समझ कर । लेकिन हम आपको आगाह कर देना चाहते है , क्योंकि कुंवर सा राजस्थान के होने वाले राजा सा है । और इनकी जिंदगी कठिनाइयों से भरी हुई होगी । ।

तभी सूर्या की ठंडी और सर्द आवाज सबके कानों में पढ़ती है - मेरा बेटा तूफान से डर जाए , इतना बुद्जिल नही है पुरोहित जी । । और मैं कुंडली में लिखी हुई किस्मत को नही मानता । मैं अपनी किस्मत खुद लिखने में यकीन रखता हूं । और मेरा बेटा भी अपनी किस्मत खुद बनाएगा । । अगर उसके नसीब में अकाल मृत्यु का योग है , तो उसका सामना करके वो मृत्यु को चुनौती देकर आयेगा । । 

तो उसकी बात सुन कर पुरोहित जी मुस्कुरा देते है । । और उससे कहते है - हर किसी की किस्मत एक सी नही होती राजा सा । आपने कई बार मृत्यु पर विजय हासिल की है इसलिए आप ऐसा कह रहे है । । लेकिन आपके बेटे की कुंडली में अकाल मृत्यु का दोष 10 साल की उम्र से लेकर केवल 26 साल तक ही है । इस बीच अगर उसने अपनी मृत्यु पर विजय हासिल कर ली तो अच्छी बात है । । लेकिन इस बीच अगर उन्हे कुछ,,

उन्होंने इतना कहा ही था की तभी कल्याणी देवी उनसे अपनी कठोर आवाज में कहती है - उपाय बताइए पुरोहित जी । । 

उनकी आवाज सुन कर सूर्या उनसे कहता है - मैं ये सब नही मानता दादी सा । और आप ये बात अच्छे से जानती है । ।

तो कल्याणी देवी उसकी बात पर उससे कहती है - आप भले नही मानते राजा सा । । लेकिन आप शायद भूल रहे है की वो राजस्थान के होने वाले राजा सा है । और उनकी हिफाजत हमारे लिए सर्वोपरि है अभी ।।

यह सुन कर सोना उनसे कहती है - लेकिन दादी सा , एक राजा होने से पहले वो हमारा बेटा भी तो है ।। और हम नही चाहते की वो राजा की जिम्मेदारी तले अपना बचपन खो दे । ।

तो सोना की बात सुन कर दादी सा उनसे कड़क आवाज mr कहती है - मर्यादा में रहिए आप रानी सा । । शायद आ भूल चुकी है की हमारे खानदान में बिंदनियों को ऐसे सबके सामने आवाज उठाने की इजाजत नहीं दी गई है । ।

उनकी बात सुन कर सोना सूर्या को देखती है । जिसकी आंखे गुस्से से धीरे धीरे लाल होने लगी थी । । वही आद्विक बिना किसी भाव के खड़ा सबकी बातें सुन रहा था । ।

तभी कल्याणी जी पुरोहित जी से कहती है - आप उपाय बताइए पुरोहित जी । । हम कुंवर सा की जिंदगी के लिए हर उपाय करेंगे । ।

तो उनकी बात सुन कर पुरोहित जी उनसे कहते है - उपाय तो मैने आपको अभी अभी ही बताया दाता हुकुम । । वो लड़की ही है कुंवर सा का रक्षा कवच । ।

यह सुन कर सभी हैरानी से पुरोहित जी को देखने लगते है । ।

तो पुरोहित जी कहते है - जिस तरह से उस छोटी बच्ची ने आज कुंवर सा की जान बचाई है इससे उसे जरूर चोट लगी होगी । और यही इस नियति की रचना है । कुंवर सा की जिंदगी से तकलीफ को दूर करने के लिए उस बच्ची को तकलीफ सहन करना पड़ेगा । । तभी दोनो एक दूसरे के पूरक होकर इस दोष को दूर कर पाएंगे । ।

लेकिन इस दुनिया में एक दूसरे के पूरक होने का रिश्ता सिर्फ एक ही रिश्ता होता है । । 

यह सुन कर सभी की नजरे अब पुरोहित जी पर टिक जाती है । जब वो कहते है - पति पत्नी का । कुंवर सा और उस बच्ची की शादी करवानी होगी । । दोनो को एक दूसरे का पूरक बनना होगा । ।

यह सुन कर वहां खड़े सभी लोगो के पैरों तले जमीन खिसक जाती है । ।

To be continued....

क्या करेंगे सूर्या और सोना । क्या धरा और आद्विक का ये रिश्ता शादी से जुड़ पाएगा । । और क्या आद्विक इस शादी के लिए मानेगा । जानने के लिए बने रहिए मेरे साथ । ।

Thankyou for reading....

Shivi.....💓

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